बिटिया
मेरे क़ौम की बेटियों अपने आप को पहचानो ईमान है क्या इसे तो ज़रा जानो जिस दिल को हासिल है अल्लाह की मोहब्बत उस दिल को क्यों होगी किसी और की चाहत दुनिया को जब ख़ुदा ने इतना हंसी बनाया होगा जन्नत का हुस्न कैसा जिसे रब ने ख़ुद सजाया किसी के चाहत की ख़ातिर अल्लाह को भूल जाना अच्छा नहीं है सुन लो इमान से दूर जाना अल्लाह को भी मानो अल्लाह की भी मानो है शैतान बड़ा दुश्मन उसके मक्ऱ को पहचानो दो दिन की ज़िंदगी है आखिर तो मौत है नहीं साथ होगा कोई बस रब का साथ है 🖋️.... फरहाना ...