इंसान की यहां पहचान खो गई
*इंसान की यहां पहचान खो गई*
एक अजब दौर की शुरुआत हो गई
इंसान की यहां पहचान खो गई
रोती है बिलखती है इंसानियत यहां
गुलामी की बेडी में जकडती जा रही है जां
कुछ बुद्धि जीवो की सरकार हो गई
इंसान की यहां पहचान खो गई
कैसे हैं ये लोग जाने क्या चाहते
इंसान को क्यों ये अछूत मानते
ईश्वर ने बनाने में ना भेद की कोई
फिर छुआछूत की गलतफहमी ये क्यों है पालते
जुल्म ज्यादती चारों ओर हो गई
इंसान की यहां पहचान खो गई
जानवरों से प्यार इंसान पर जुल्म है करते
फिर भी ये खुद को इंसान है समझते
जानवरों के नाम पर इंसान का कत्ल आम हो गया
कुत्ता यहां पाक इंसान नापाक हो गया
ये तो अब रोज की ही बात हो गई
इंसान की यहां पहचान खो गई
एक अजब दौर की शुरुआत हो गए
इंसान की यहां पहचान खो गई
🖋️...... फरहाना
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