कोरोना का कहर

 हर ओर मेरे मुल्क में मातम का शोर है 

अब बस भी करो इसे नहीं सब्र और है 

हर ओर मेरे मुल्क में मातम का शोर है ।

चीखें पुकार अस्पताल के बाहर लगी हुई

कहीं बेबसी कहीं बदनसीबी चेहरों पर मली हुई ।

हर बंदा परेशान बड़ा मजबूर खड़ा है

इस दुख बेबसी का बताओ क्या हल भला है ।

लाशें बिछी हुई है श्मशान भरा है

कब्रिस्तान में भी जगह का मसला खड़ा है। 

किस ओर बढ़ा जा रहा यह काल चक्र का

और कितना दिखाएगा यह हमें वक्त बुरा ।

तड़पते हुए मरीज डॉक्टर को बुला कर

फरियाद कर रहे हैं अपनी जिंदगी की ये ।

बिछड़ जो गया इस दौर में अपना किसी का

तो आह भर रह रहे हैं दूर से ही वे ।

डॉक्टर भी है लाचार मरीज भी बेबस 

यह दौर कैसा कोरोना का हम पर आ पड़ा है ।

कभी किसी पर इल्जाम कभी उंगली उठाते हैं हम 

अपनी बेबसी इसी तरह छुपाते हैं हम ।

चुन के लाए थे जिसे मददगार समझकर

कारोबारी बनकर हमारा ही सौदा कर रहा है ।

जात-पात ऊंच-नीच की लड़ाई में फंसा कर हमें

देश को बेच कर वह अपनी जेबें भर रहा है ।

हर और मेरे मुल्क में मातम का शोर है 

अब बस भी करो इसे नहीं सब्र और है ।

हर ओर मेरे मुल्क में मातम का शोर है 

हर और मेरे मुल्क में मातम का शोर है ।

                                   .....🖋फरहाना 


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