एक भिखारी

 # *# *एक भिखारी*  #

नजरों में आपके शून्य, निर्गुण, व्यर्थ, अनाड़ी,

हां साहेब मैं हूं एक भिखारी ।

धूप छांव में चलता हूं,

गली गली मैं फिरता हूं ।

हाथ में कटोरा आंख में पानी,

बस यही है मेरी ज़िंदगानी ।

भूखा हूं सबको यह सुनाता हूं,

गली-गली सिग्नल सिग्नल चिल्लाता हूं ।

फिर भी रात को भूखा सो जाता हूं ।

दया करुणा के भाव से कई लोग मुझको तकते हैं,

एक दो पैसे मेरे भी हाथ पे वो रखते हैं ।

मेरे लिए ना अस्पताल ना दवाई, 

मेरे लिए ना बिस्तर ना रजाई । 

फुटपाथ ही मेरा डेरा है यही रैन बसेरा है ।

सर्दी गर्मी और बरसात मेरे लिए एक से हालात ।

जीवन का हर पल जो मैं जीता हूं,

दिल में लाखों गम मैं पीता हूं ।

तरसती आंखें हैं, सपने हैं, कुछ अरमान हैं मेरे, 

लेकिन क्या वो पूरे हो पाएंगे ? 

क्योंकि वो कल्पना और ये सत्य हैं मेरे ।

ना भूत ना वर्तमान ना कोई भविष्य नजर आता है,

एक शून्य में जिए जा रहा हूं मैं ।

बस यही जीवन का बहीखाता है ।

नजरों में आपके शून्य, निर्गुण, व्यर्थ, अनाड़ी,

हां साहेब मैं हूं एक भिखारी ।

हां साहेब मैं हूं एक भिखारी ।

....🖋️ फरहाना, चंडीगढ़  #

नजरों में आपके शून्य, निर्गुण, व्यर्थ, अनाड़ी,

हां साहेब मैं हूं एक भिखारी ।

धूप छांव में चलता हूं,

गली गली मैं फिरता हूं ।

हाथ में कटोरा आंख में पानी,

बस यही है मेरी ज़िंदगानी ।

भूखा हूं सबको यह सुनाता हूं,

गली-गली सिग्नल सिग्नल चिल्लाता हूं ।

फिर भी रात को भूखा सो जाता हूं ।

दया करुणा के भाव से कई लोग मुझको तकते हैं,

एक दो पैसे मेरे भी हाथ पे वो रखते हैं ।

मेरे लिए ना अस्पताल ना दवाई, 

मेरे लिए ना बिस्तर ना रजाई । 

फुटपाथ ही मेरा डेरा है यही रैन बसेरा है ।

सर्दी गर्मी और बरसात मेरे लिए एक से हालात ।

जीवन का हर पल जो मैं जीता हूं,

दिल में लाखों गम मैं पीता हूं ।

तरसती आंखें हैं, सपने हैं, कुछ अरमान हैं मेरे, 

लेकिन क्या वो पूरे हो पाएंगे ? 

क्योंकि वो कल्पना और ये सत्य हैं मेरे ।

ना भूत ना वर्तमान ना कोई भविष्य नजर आता है,

एक शून्य में जिए जा रहा हूं मैं ।

बस यही जीवन का बहीखाता है ।

नजरों में आपके शून्य, निर्गुण, व्यर्थ, अनाड़ी,

हां साहेब मैं हूं एक भिखारी ।

हां साहेब मैं हूं एक भिखारी ।

....🖋️ फरहाना, चंडीगढ़

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