मज़दूर, Mazdoor
# *मज़दूर* #
जीवन में बड़े कठिन समय बिताते हैं,
हम मज़दूर हैं मज़दूरी कर अपना घर चलाते हैं ।
पेट की खातिर अपनों को छोड़ दूरदराज़ आते हैं,
बेगानों के बीच नए रिश्ते बनाते हैं।
हम मज़दूर हैं मज़दूरी कर अपना घर चलाते हैं
काम की खातिर अपनी जान पर खेल जाते हैं,
दिन-रात मज़दूरी कर नए शाहकार बनाते हैं।
दुनिया में सड़कें मकानात हमारे दम से बनते हैं,
छोटे बड़े कारखाने हमारे दम से चलते हैं।
काम की ख़ातिर कभी बीहड़ जंगल में भी रुकते हैं,
कभी पहाड़ों को काट जिंदगी में रफ्तार भरते हैं।
कई छोटे-बड़े कामों के लिए हमारी ही ज़रूरत है,
जीवन को सुखमय बनाने के लिए हमारी ही ज़रूरत है।
हम चलते रहे तो सारा देश चलता है,
हम रुक जाएं तो सारा देश ठहरता है।
फिर भी हमारी परवाह किसी को कहां होती,
हमारे जीवन विकास की चिंता किसी को कहां होती।
जीवन में बड़े कठिन समय बिताते हैं,
हम मज़दूर हैं मज़दूरी कर अपना घर चलाते हैं।
हम मज़दूर हैं मज़दूरी कर अपना घर चलाते हैं।
.....🖋️ *फरहाना* , चंडीगढ़
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