नजर
**नजर**
थी नजर की ख़ता
दिल को सहना पड़ा
बात इतना ही था
और फसाना बना ।
उसकी नज़रों में थी
बड़ी दिलकश अदा
दिल खुद ब खुद उसका
दीवाना बना ।
अब नज़र में कोई और
जंचता नहीं
इस दिल में कोई और
बसता नहीं ।
नज़र से उतरकर
वो रुह में बस गई
उसे ज़िदंगी में बसा लूं
है तमन्ना यही ।
... 🖋️ फरहाना, चंडीगढ़
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