अहिंसा के पुजारी

 *अहिंसा के पुजारी* 


क्रोध ,कपट और लोभ को छोड़ 

सत्य अहिंसा ले अपना 

भला तू कर औरों का 

मन अपना सुखमय बना 


नदी ,वृक्ष ,धरती क्या 

अपने लिए ही जीती है 

ताल क्या अपने पानी को 

स्वयं सारा पीती है 


हिंसक प्राणी भी तो हिंसा से 

पेट अपना भरता है 

पेट उसका भरा हो तो 

अहिंसा पर ही चलता है 


मनुष्य तूने क्यों हिंसा को 

खुद पर है अपनाया 

अहिंसा का जब रास्ता 

हमारे बड़ों ने हैं सिखलाया 


दुनिया में जो ऋषि मुनि, गुजरे 

या गुजरे पीर ,फकीर 

सत्य ,अहिंसा की उन्होंने 

दिखलाई हमें तस्वीर 

                     🖋️....   फरहाना शेख....

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