जीवन एक रहस्य
*जीवन एक रहस्य*
जिंदगी का हर लम्हा मौत तक है जा रहा
तेरे संग बैठा फरिश्ता मौत के बिगल है बजा रहा
जान पाया क्या तू अपने जिंदगी के चक्र को
पढ़ पाया क्या तू अपने सांसों के तर्क को
क्यों है सांसे क्यों है जीवन और क्यों मर जाना है
दिल की धड़कन मन की उलझन क्या ये ताना-बाना है
जिम्मेदारी का बोझ भी है रिश्तो का सोच भी
खुशी भी है गम भी है ख्वाहिशों का रम भी है
सारा जीवन देकर अपना आशिया बनाएगा
खुशियों की तलाश में जाने क्या-क्या कर जाएगा
सारा कुछ यही छोड़कर तू एक दिन मर जाएगा
जो संजोया था यहां कुछ न लेकर जाएगा
फिर संजोयना किस लिए ये रिश्ते नाते किस लिए
छोड़कर जाना ही है तो दिल लगाना किस लिए
कुछ तो है यह जिंदगी सोच के आगे कहीं
बेमतलब ये सारी चीजें तो हो सकती नहीं
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