हाय मेरे मुल्क का क्या हाल हो गया

 *हाय मेरे मुल्क का क्या हाल हो गया* 


इंसान यहां अब शैतान हो गया 

जुल्म सितम भी सरेआम हो गया 

हक़ की बात करना भी दुश्वार हो गया

हाय मेरे मुल्क का क्या हाल हो गया....२


एक तबके पर ज्यादती एक तबके को छूट 

कैसी तेरी रणनीति ये कैसा करतूत

ज़ालिम यहां साधु बेकसूर गुनहगार हो गया 

हाय मेरे मुल्क का क्या हाल हो गया....२


नफरत में डूबे हुए दलाल बैठे हैं 

बोली लगाने जानो की सरकार बैठे हैं

झूठ फैलाना मीडिया का व्यापार हो गया 

हाय मेरे मुल्क का क्या हाल हो गया....२


रोज नहीं साज़िशे रोज नया झूठ 

दोनों हाथों से साहिब रहे जनता को लूट 

इंसाफ यहां सत्ता का दलाल हो गया

हाय मेरे मुल्क का क्या हाल हो गया....२

      🖋️..... फरहाना

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