इंसाफ

 *इंसाफ* 


इंसाफ कब तक न मिलेगा आखिर

जब तलक के खुदा ने हाथ में तेरे ताकत बक्शी 

बेगुनाह का खून तो मांगेगा अपने जुल्म का बदला

औरतों की आबरू क्या फरियाद ना करेगी रब से

जो जुल्म हुए बच्चों पर तेरे इशारों से

उनके आंसू तेरी हस्ती को डूबोएंगे नहीं

आज इतरा के तू चल ले तुझे है ढील  मिली

कल जब ले लेगा तुझसे वो ताकत अपनी 

तो चकरा के तू कहीं ढह जाएंगा

तेरी तो मौत पर भी किसी को अफसोस ना आएगा

इंसाफ कब तक ना मिलेगा आखिर

जब तलक के खुदा ने हाथ में तेरे ताकत बक्शी

वो फिरौन जो समझता था खुद को दुनिया का खुदा

वो कारून जिसे खजाने पर अपने था नाज़ बड़ा

वो शद्दाद कि जिसने खुदा से बगावत की थी

आज है कहां दुनिया में वो जो कल थे मगरूर बड़े

खुदा ने एक ज़रा जो अपनी कस्सी डोरी

सब औंधे मुंह गिर पड़े दुनिया में इतराने वाले

इंसाफ कब तक ना मिलेगा आख़िर

जब तलक ए खुदा ने हाथ में तेरी ताकत बक्शी

   🖋️..... फरहाना

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