अपने जुल्म को इस्लाम का नाम ना दो
*अपने जुल्म को इस्लाम का नाम ना दो*
इस्लाम नाम है मोहब्बत का
जिंदगी जीने का जीने देने का
इस्लाम मोहब्बत ही बस सिखाता है
पड़ोसी भूखा है तो गुनहगार तुम्हें बताता है
इस्लाम के नाम कत्ल करने वाले
तुमने इस्लाम को जाना ही नहीं
नबी का दम भरने वाले
नबी को तुमने पहचाना ही नहीं
वो तो दुनिया में आए रहमते लेकर
उनकी तो शान ही निराली थी
वो तो मिल्लत का दर्श देते थे
कमजोर का हाथ थाम लेते थे
लाख जुल्म सहकर भी
जालिमों को दुआएं देते थे
तुम एक कमजोर पर जुल्म कर रहे
और इस्लाम का दम भर रहे
तुम इंसान तो बन ना सके
और इंसाफ की बात कर रहे
🖋️...... फरहाना
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