दोहरी नीति

 *दोहरी नीति* 


ये कैसी दोहरी नीति है 

पशु की है जान प्यारी 

तो वृक्षों से क्यों बैरी है 

पशु हमारे काम है आता 

वृक्ष भी तो आता है

पशु प्यार से पाला जाता 

वृक्ष भी तो पलाता है 

फिर एक को खाना पाप 

और दूसरे को खाना पुण्य है क्यों 

रब ने दोनों दिया जब हमको 

उसमें फिर वैषम्य है क्यों 

इंसान की खुद की चाहत है 

क्या खाए और क्या पिए 

रोकना क्यों लोगों को उससे 

जो रब ने हमको है दिए 

कुर्बानी का मकसद देखो तो 

लोगों के ही हित का है  

भाईचारा और परोपकार सिखाता

रब की ये तो कृपा है


      🖋️.... फरहाना

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