खुशबू मेरे आंगन की
*खुशबू मेरे आंगन की*
खुशबू मेरे आंगन की
मेरे रब की तू रहमत है
मांगा जिसे दिल से था
वो मेरी तू नेअमत है
तू आज इस चौखट से
रुख़सत हो जाएगी
एक नए आशियाने में
खुशियां फैलाएगी
नाज़ों से पली बेटी
तुझे हर हाल में जाना है
घर छोड़ के बाबुल का
घर अपना बसाना है
रोती हुई आंखों से
फरियाद ये मां की है
शादाब रहे हरदम
दुआ दिन रात ये मां की है
जीवन में बस खुशियां हो
दुख का न रहे साया
मिले प्यार वहां इतना
रहे बहार तुझ पर छाया
खुशबू मेरे आंगन की
मेरे रब की तू रहमत है
मांगा जिसे दिल से था
वो मेरी तू नेअमत है
🖋️...... फरहाना
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