मैं तेरा उम्मती
*मैं तेरा उम्मती*
ए खुदा के मेरे
महबूब ए रसूल
तुझ को मेरा सलाम
मैं हूं तुझ पे कुर्बान
तू मेरा है नबी
मैं तेरा उम्मती
मैं तेरा उम्मती
मैं तेरा उम्मती
ये तो दुनिया
अंधेरों में डूबी थी बस
हर तरफ जुल्म का
दौड़ दौरा ही था
बुत खुदा बन गए
कुफ्र पलने लगा
दुनिया से इंसाफ
जेसे मरने लगा
कहीं जुल्मों सितम
कहीं थी सिसकियां
कहीं इंसानियत की
उठ रही थी आरथियां
कोई बेबस बड़ा
कोई बेखौफ था
हर तरफ जुल्म का
एक अजब दौर था
आप की आमद से
हर शय बदलने लगी
दिल में इंसानियत
फिर चमकने लगी
जिसने देखा
वो शैदा हुआ आप पर
ककंरो पत्थरों
ने भी कलमा पढ़ा
ए खुदा के मेरे
महबूब ए रसूल
तुझ को मेरा सलाम
मैं हूं तुझ पर कुर्बान
तू मेरा है नबी
मैं तेरा उम्मती
मैं तेरा उम्मती
मैं तेरा उम्मती
🖋️ फरहाना
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