Posts

Showing posts from October, 2021

ज़ुल्म का दौर

 ज़ुल्म का दौर दौर जुल्म का छटा कहां है  गरीबों को हक बटा कहां हैं अब भी ताकत के नशे में  चूर ज़्यादतीया करते हैं  दौलत फिर दिखला कर अपने  करतूतों को ढकते हैं  इंसाफ भी घुटने टेक चुका अब सियासी गलियारों में  मीडिया भी तो बिक चुकी है  दौलत की झनकारो में  कुछ बहुत अमीर ताज़िर के हाथों  ये सियासत भी बिक जाती है  गरीबों का हक मार मार कर  जेब उनकी भरवाती हैं  हक के लिए जो उठता है  उस सर को कुचला जाता है  जो आवाज उठाता है  उन सब को मसला जाता है  कभी डर कभी इज्जत की खातिर  गरीब चुप हो जाता है  ज़ालिम उनकी कमजोरी से  अक्सर खेल जाता है  दौर जुल्म का छठा कहां हैं  गरीबों को हक बटा कहां है                    ‌‌‌‌ ‌   🖋️.... फरहाना शेख

अहिंसा के पुजारी

 *अहिंसा के पुजारी*  क्रोध ,कपट और लोभ को छोड़  सत्य अहिंसा ले अपना  भला तू कर औरों का  मन अपना सुखमय बना  नदी ,वृक्ष ,धरती क्या  अपने लिए ही जीती है  ताल क्या अपने पानी को  स्वयं सारा पीती है  हिंसक प्राणी भी तो हिंसा से  पेट अपना भरता है  पेट उसका भरा हो तो  अहिंसा पर ही चलता है  मनुष्य तूने क्यों हिंसा को  खुद पर है अपनाया  अहिंसा का जब रास्ता  हमारे बड़ों ने हैं सिखलाया  दुनिया में जो ऋषि मुनि, गुजरे  या गुजरे पीर ,फकीर  सत्य ,अहिंसा की उन्होंने  दिखलाई हमें तस्वीर                       🖋️....   फरहाना शेख....