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Showing posts from July, 2022

चलो एक क़ौम हो जाए

 *चलो एक क़ौम हो जाए* चलो ए नौजवानों फिर से हम एक क़ौम हो जाए  अपने दीन को जाने और दुनिया से बेखौफ हो जाए   हमारा दीन हमारे वास्ते रब की इनायत है  हमारे आक़ा ने जो जी के दिखा दी वो सदाकत है  जिसे रब की रज़ा हासिल उसे किस शय की जरूरत हो  उस पर रब की इनायत दिल में सुकून की नेमत हो  वो सहाबी ,वो शोहदा, वो गाजी को देखो  वो अल्लाह वाले नमाजी को देखो  जिसे दौलत ,ना इज्जत ना ,शोहरत की चाह थी  बस नेकी, इबादत और सुन्नत की चाह थी  जिसने ठुकराई पैरों से दुनिया की शाही  जिसने अदल, इंसाफ दुनिया में नाफिज करके दिखाई क्यों अपनी पहचान भूले हैं दुनिया में डूबे हैं  क्यों बुराई में फसे लानत में धसे हैं  चलो ए नौजवानों फिर से हम एक क़ौम हो जाए  अपने दीन को जाने और दुनिया से बेखौफ हो जाए     🖋️..... फरहाना

सुहाना सावन

 सुहाना सावन धरती को नई हरी चुनर ओढ़ा गया सावन आ गया सुहाना सावन आ गया जो कल तक तप रही थी  गर्मी में झुलस रही थी  खेतों में दरार हो चली  धरती भी बेहाल हो चली  उस पर शीतल जल छा गया  सावन आ गया सुहाना सावन आ गया आई फिर से खुशहाली है  पेड़ों पर भी हरियाली है  दिल में नई उमंग तारी है  ठंडी फुहारों से उसने सबके मन को हर्षा गया  सावन आ गया सुहाना सावन आ गया रात और दिन बदली छाई है  गीली गीली रुत आई है  छपक छपक चलते हैं बच्चे  पानी उनको लगते अच्छे  तन मन सबका इस सावन ने तो भीगा गया  सावन आ गया सुहाना सावन आ गया         🖋️..... फरहाना

दोहरी नीति

 *दोहरी नीति*  ये कैसी दोहरी नीति है  पशु की है जान प्यारी  तो वृक्षों से क्यों बैरी है  पशु हमारे काम है आता  वृक्ष भी तो आता है पशु प्यार से पाला जाता  वृक्ष भी तो पलाता है  फिर एक को खाना पाप  और दूसरे को खाना पुण्य है क्यों  रब ने दोनों दिया जब हमको  उसमें फिर वैषम्य है क्यों  इंसान की खुद की चाहत है  क्या खाए और क्या पिए  रोकना क्यों लोगों को उससे  जो रब ने हमको है दिए  कुर्बानी का मकसद देखो तो  लोगों के ही हित का है   भाईचारा और परोपकार सिखाता रब की ये तो कृपा है       🖋️.... फरहाना