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Showing posts from June, 2023

बिटिया

 मेरे क़ौम की बेटियों  अपने आप को पहचानो  ईमान है क्या  इसे तो ज़रा जानो जिस दिल को हासिल है  अल्लाह की मोहब्बत  उस दिल को क्यों होगी  किसी और की चाहत  दुनिया को जब ख़ुदा ने  इतना हंसी बनाया  होगा जन्नत का हुस्न कैसा  जिसे रब ने ख़ुद सजाया  किसी के चाहत की ख़ातिर  अल्लाह को भूल जाना  अच्छा नहीं है सुन लो  इमान से दूर जाना अल्लाह को भी मानो  अल्लाह की भी मानो  है शैतान बड़ा दुश्मन  उसके मक्ऱ को पहचानो  दो दिन की ज़िंदगी है  आखिर तो मौत है  नहीं साथ होगा कोई  बस रब का साथ है          🖋️.... फरहाना ...

रब्बे ज़ुलज़लाल

 *रब्बे ज़ुलज़लाल*  कौन सुबह तुलू कर सूरज   डुबोता है शाम को कौन मिट्टी से बना   मिटाता इंसान को है किसका नूर फैला  आसमां में चार सु किसकी क़ुदरतो से  गुलों में है रंगो बू है कौन जो जहां को  चलाता ही जा रहा सितारों को आसमां में  फैलाता ही जा रहा किसने समंदर में  मोती बना दिया ज़मीं को चीर किसने गल्ला उगा दिया है किसके इल्म की  नहीं कोई इंतेहा है किसके कब्जे़ में  ये ज़मीन ओ आसमां वह एक ही जो सबका  खालिक है मालिक भी वो एक जिसका कोई भी  शरीक ही नहीं वो अल्लाह है अल्लाह है अल्लाह ही तो है  तेरा मेरा सब का वो रब्बे ज़ुलज़लाल                   ...🖋️ फरहाना ...