सुहाना सावन
सुहाना सावन
धरती को नई हरी चुनर ओढ़ा गया
सावन आ गया सुहाना सावन आ गया
जो कल तक तप रही थी
गर्मी में झुलस रही थी
खेतों में दरार हो चली
धरती भी बेहाल हो चली
उस पर शीतल जल छा गया
सावन आ गया सुहाना सावन आ गया
आई फिर से खुशहाली है
पेड़ों पर भी हरियाली है
दिल में नई उमंग तारी है
ठंडी फुहारों से उसने सबके मन को हर्षा गया
सावन आ गया सुहाना सावन आ गया
रात और दिन बदली छाई है
गीली गीली रुत आई है
छपक छपक चलते हैं बच्चे
पानी उनको लगते अच्छे
तन मन सबका इस सावन ने तो भीगा गया
सावन आ गया सुहाना सावन आ गया
🖋️..... फरहाना
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