*आज का फलस्तीन* या रब ज़रा कर दे, अपनी रहमत उन पर बड़ी तकलीफ़ में फंसे हैं, तेरे बंदे फलस्तीनी कहीं राहत ना मदद है, कैसी मुश्किल की घड़ी है हर तरफ ज़ोर ज़ालिम का, मौत सर पर ही खड़ी है ज़माना देख रहा है, यहां बच्चों की लाशों को फिर भी खामोश हैं सारे ,सबको अपनी ही पड़ी है हुक्मरां बिक गए सारे, ज़मीर ज़िंदा नहीं उनका फलस्तीनीयों की हालत पर भी, दिल पिघला नहीं जिनका वो बेबसी वो तकलीफ़, जो अयां हो नहीं सकती गुजर रही है जो उनपर, वो बयां हो नहीं सकती ना खाना है ना पानी है , ज़ख्म से चूर हैं सारे मकां ज़ालिम ने डाह दिया , वो घर से दूर हैं सारे बिलखते बच्चे रोती मांऐ, और तड़पते बाप को देखो ऐ राहत में रहने वालो , ये ग़ज़ा के हालात को देखो या अल्लाह बदर के फरिश्तों से, या अबाबील से मदद कर दे ज़ालिम इजराइल से अपने बंदे फलस्तीनीयों कि मदद कर दे 🖋️ ..... फरहाना...
its good to hear, and contain a great message within.
ReplyDeleteThanks for your kind words.
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