जवाब तो दो ना

 *जवाब तो दो ना* 


नफरत में क्यों जीते हो दिल को साफ करो ना 

इंसान हो इंसानियत की बात करो ना

नफरत में क्यों जीते हो दिल को साफ करो ना


आतिश से जला देते हो गरीबों का झोपड़ा 

हिम्मत है तो अमीरों के घर में आग भरो ना 


जो लूट के ले जाते हैं सरमाया देश का

उसका ज़रा जाकर गिरेबान धरो ना 


बुर्के पर पाबंदी कभी शरीयत में मुदाखलत 

मसला क्या है तुम्हारा ज़रा खुल के कहो ना 


यूं मस्जिदों को तोड़कर साबित क्या कर रहे 

जब खुदा एक है तो तलाश क्या रहे 


रोज़-रोज़ तुम नए मसले हो बनाते

कभी सरकार के कामों का भी बखान करो ना


जो हिंदुस्तान में रहकर कर रहा चाइना और पाकिस्तान के लिए मुखबरी

 उनके लिए भी जरा दो शब्द कहो ना


महंगाई ने तो पहले ही कमर तोड़ रखी है 

रोज़गार भी नहीं है यह भी तो बोलो ना 


रोज़गार, स्कूल, हस्पताल देना किसका काम है 

देश का विकास करना किसका काम है 


मुद्दे से हटाने के लिए करना यूं मनमानी 

ये जुल्म नहीं तो क्या है जवाब तो दो ना


...🖋️ फरहाना .

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