कौन कहता है

 कौन कहता है ?

वक्त का गर्द धुंधला देती है सारी यादों को 

कौन कहता है ?

वक्त ऐसा मरहम है मिटा देती है सारे जख्मों को 

कुछ ऐसे भी यादें होती है जनाब 

जिन पर कुछ भी रवा नहीं होती 

कुछ ऐसे भी ज़ख्म होते हैं जनाब

जिसकी कोई दवा नहीं होती

       🖋️..... फरहाना

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