गंगा तुम बहती रहना

 *गंगा तुम बहती रहना* 


गंगा तुम बहती रहना 

अपना शीतल जल हमें 

यूं ही सदा देती रहना 

गंगा तुम बहती रहना 


देश मेरा किसानों का है 

विद्वानों, बलिदानों का है 

इस देश की मिट्टी में अपने 

जल से जीवन भरती रहना 

गंगा तुम बहती रहना 


उत्तर से आती हो तुम 

पूरब तक जाती हो तुम 

जाने कितने जीवों की 

प्यास को बुझाती हो तुम 

हमारे जीवन में तुम अपना 

मीठा जल भरती रहना 

गंगा तुम बहती रहना 


ना कोई तुझ में भेदभाव 

ना कोई तुझ में ईर्ष्या है 

निस्वार्थ से सब को पाल रही 

हम सबके लिए ये शिक्षा है 

अपने इसी रूप से हमारा 

जीवन यापन करती रहना 

गंगा तुम बहती रहना 

      🖋️.... फरहाना

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