*बदलती जिंदगी*

 *बदलती जिंदगी* 


जिंदगी की शाम है ये 

या शुरू नई कहानी है

ठहरे हुए पानी पे 

क्यों मौजों की रवानी है 


एक वक्त गुजर गया यूंही 

तूफान तो कब का ठहर गया 

बदलते रूतो के साथ में 

फिर हवा हुई दीवानी है 


वो साज़ कभी था नया नया 

जिससे धुन फिज़ा में बिखरते थे 

अब तार भी उसके टूट गए 

फिर भी गीत कोई गुनगुनानी है 


कौन भला बतलाएगा 

मकसद ये जीने का है क्या 

जो ठहर गया वो कहां गया 

जो गुजर गया वो तो फानी है 


मैंने अलाव की तपिश से 

पतंगे को मरते देखा है

फिर भी उसकी रोशनी में मलंग है वो

यही उसकी जिंदगानी है

                   🖋️ ......फरहाना

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