अल्लाह हू अकबर
*अल्लाह हू अकबर**
अल्लाह हू अकबर, अल्लाह हू अकबर
नारा है ये मुजाहिदों का, सुन लो ज़माना
ज़ालिम के ज़ुल्मों से नहीं है, हमको घबराना
जब तक की ज़िंदगी है, इस्लाम पर ही जिएंगे
किस्मत में अगर हो तो, जामे शहादत भी पियेंगे
अल्लाह हू अकबर, अल्लाह हू अकबर
इस कौम के लोगों को ना, कमज़ोर समझना
फौलाद हैं हम हमको ना, कुछ और समझना
अपने जुल्मो सितम से हमें, डरा ना सकोगे
लो सर पे कफन बांध ली, तुम क्या ही कर लोगे
अल्लाह हू अकबर, अल्लाह हू अकबर
इस्लाम में मुदाख़लत, बर्दाश्त नहीं है
इस दिल में खुदा के सिवा, कोई और नहीं है
अमनो सुकूं के साथ हम, रहते हैं ज़मीं पर
जुल्म व नफरत नहीं, ज़ेब है हम पर
अल्लाह हू अकबर, अल्लाह हू अकबर
हुज़ूर ने सिखाया जो, पैग़ाम वही है
हर मखलूक के लिए मोहब्बत, ये फरमाने नबी है
दादा आदम से शुरू है, तारीख़ हमारी
हर दौर में रहेगी ये, शैतानों पे भारी
अल्लाह हू अकबर ,अल्लाह हू अकबर
....🖋️ फरहाना, चंडीगढ़
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